सपा बसपा गठबंधन पर मुहर के बाद सामने आने लगे प्रत्याशियों के नाम!जानें क्या हुआ था जब 25 साल पहले साथ आए थे SP-BSP
नमस्कार दोस्तों फिर से स्वागत है आपका हमारे ब्लॉग FILMY GURUDEV पर आज हम बात करेंगे U .P . में हो रहे गठबन्धन की2019 के आम चुनावों के लिए उत्तर प्रदेश में एसपी और बीएसपी ने साथ मिलकर चुनाव लड़ने का फैसला किया है। यह पहला मौका नहीं है जब एक-दूसरे का विरोध करने वाली एसपी-बीएसपी साथ आई हों। करीब 25 साल पहले भी दोनों पार्टियां साथ मिलकर मैदान में उतरी थीं। बीजेपी को रोकने के लिए बने इस गठबंधन के सामने राज्य में मुलायम सिंह यादव और कांशीराम वाली जोड़ी का 93 वाला करिश्मा दोहराने की चुनौती होगी। 1993 में इस गठबंधन को राम मंदिर लहर के बीच बीजेपी के विजय को रोकने में सफलता मिली थी। 1993 में जहां गठबंधन की रूपरेखा मुलायम सिंह यादव और कांशीराम ने तैयार की थी, वहीं इस बार स्वरूप मायावती और अखिलेश यादव ने तैयार किया है।
1993 में SP-BSP की दोस्ती से ऐसे बंटी थीं सीटें
उत्तर प्रदेश के 1993 के विधानसभा के चुनाव में कांशीराम और मुलायम सिंह के सामने बीजेपी की राम लहर की काट ढूंढना सबसे बड़ी चुनौती थी। ऐसे में दोनों नेताओं ने साथ मिलकर चुनाव लड़ने का फैसला किया। तब यूपी में विधानसभा की कुल 422 सीटें थीं। समाजवादी पार्टी ने 256 सीटों पर और बीएसपी ने 164 सीटों पर चुनाव लड़ा। एसपी ने 109 सीटों पर जीत दर्ज की और बीएसपी ने 67 सीटों पर। इस तरह दोनों दलों ने मिलकर 176 सीटों पर कब्जा किया। इस गठबंधन के बावजूद बीजेपी ज्यादा सीटें जीतने में कामयाब रही थी। बीजेपी को 1993 के विधानसभा चुनाव में 177 सीटें मिली थीं। वहीं वोट शेयर की बात करें तो। एसपी और बीएसपी का वोट शेयर 29.06 प्रतिशत रहा था। जबकि बीजेपी 33.3 प्रतिशत वोट हासिल करने में कामयाब रही थी। हालांकि एसपी और बीएसपी ने जनता दल जैसे कुछ दलों के साथ मिलकर यूपी में सरकार बनाई थी।
पैटर्न 2014 वाला रहा तो?
यदि वोटिंग पैटर्न 2014 के लोकसभा चुनाव की तरह ही रहता है तो एसपी बीएसपी के गठबंधन की वजह से बीजेपी को आधे से ज्यादा सीटों से हाथ धोना पड़ सकता है। 2014 के आम चुनाव में यूपी में बीजेपी ने 71 सीटों पर बड़ी जीत दर्ज की थी, अपना दल 2 सीट जीती थी, एसपी ने 5, कांग्रेस ने दो और बीएसपी अपना खाता भी नहीं खोल सकी थी। साधारण गणित के हिसाब से समझें तो 2014 में बीजेपी और अपना दल का वोट शेयर 43.63 प्रतिशत था, जो एसपी और बीएसपी के संयुक्त वोट शेयर 42.12 प्रतिशत से ज्यादा है, लेकिन सीट दर सीट विश्लेषण से पता चलता है कि एसपी और बीएसपी का वोट शेयर एक साथ मिलाया जाए तो 41 सीटें ऐसी हैं, जहां यह बीजेपी के वोट शेयर को मात देता है। यदि आरएलडी के वोट शेयर को भी इसमें जोड़ें तो 42 सीटों पर बीजेपी पिछड़ सकती है।
2017 के विधानसभा चुनाव का गणित
2014 के आम चुनाव के बाद बीजेपी के लिए यूपी विधानसभा का चुनाव काफी अहम था। इस चुनाव में बीजेपी ने 384 सीटों पर चुनाव लड़ा और 312 पर जीत दर्ज की। बीजेपी की सहयोगी अपना दल और एसबीएसपी 19 सीटों पर लड़ी 13 पर जीत दर्ज की। बीएसपी ने 403 सीटों पर चुनाव लड़ा और 19 पर जीत दर्ज की। एसपी 311 पर चुनाव लड़ा और 47 पर जीती। आरएलडी ने 277 पर चुनाव लड़ा और एक सीट जीती। वहीं कांग्रेस ने 114 पर चुनाव लड़ा और महज 7 सीटों पर जीत दर्ज की। यदि 2019 में वोट इसी पैटर्न पर पड़ता है तो गणित कुछ ऐसा होगा। बीजेपी, अपना दल और एसबीएसपी का कुल वोट शेयर 41.35 प्रतिशत है। जबकि एसपी बीएसपी का संयुक्त वोट शेयर 44.05 प्रतिशत होता है। वहीं यदि इसमें आरएलडी को भी शामिल किया जाए तो यह 45.83 प्रतिशत होगा।
2019 में मोदी सरकार की परफॉर्मेंस सबसे अहम मुद्दा होगी। गठबंधन की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह अपनी जातीय समीकरणों को कैसे बैठाती हैं और खोए हुए वोट बैंक को वापस लाने के लिए क्या करती हैं? राजनीतिक जानकार दीपक कबीर का कहना है, 'एसपी मुख्य तौर पर यादवों और मुस्लिमों के वोट पर जीतती है। वहीं बीएसपी का वोट बैंक दलित समाज है। हालांकि यह गठबंधन मुस्लिमों के लिए पहली पसंद होगा। एसपी के प्रति वफादार यादव भी इस गठबंधन को वोट करेंगे, लेकिन बड़ी संख्या ऐसे यादवों की भी होगी जो बीएसपी के लिए वोट नहीं करना चाहेंगे, तो उनके पास बीजेपी ही विकल्प होगा।'
2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव को लेकर यूपी की दो प्रमुख पार्टियां सपा और बसपा के बीच महागठबंधन पर मुहर लग गई है। गठबंधन के तहत दोनों दल 38-38 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। इन सभी सीटों पर अब प्रत्याशियों के नाम भी आने शुरू हो गए है। कहा जा रहा कि इन सीटों से सपा और बसपा से ये उम्मीदवार हो सकते हैं।
बसपा से हो सकते हैं उम्मीदवार
घोसी लोकसभा सीट पर- अब्बास अंसारी-बसपागाजीपुर लोकसभा सीट -अफजाल अंसारी-बसपा
मछलीशहर लोकसभा सीट-भोलेनाथ -बसपा
भदोही लोकसभा सीट - रंगनाथ मिश्रा-बसपा
संतकबीर लोकसभा सीट- भीष्म शंकर -बसपा
डुमरियागंज लोकसभा सीट- आफताब आलम बसपा
मिर्जापुर लोकसभा सीट- समुद्र बिंद - बसपा
प्रतापगढ़ लोकसभा सीट-आसिफ निजामुद्दीन सिद्दीकी -बसपा
फतेहपुर लोकसभा सीट-सुखदेव वर्मा-बसपा
रॉबर्ट्सगंज लोकसभा सीट-शारदा प्रसाद -बसपा
महाराजगंज लोकसभा सीट-गणेश शंकर सिंह-बसपा
सलेमपुर लोकसभा सीट -रविशंकर सिंह -बसपा
बांसगांव लोकसभा सीट - सदल प्रसाद- बसपा
सपा से हो सकते हैं उम्मीदवार
आजगमढ़-लोकसभा सीट-दुर्गा यादव-सपालालगंज लोकसभा सीट- घुरा राम-सपा
बलिया लोकसभा सीट-नीरज शेखर -सपा
चंदौली लोकसभा सीट-मनोज सिंह डब्लू-सपा
जौनपुर लोकसभा सीट- पारसनाथ यादव - सपा
इलाहाबाद लोकसभा सीट-रेवती रमन सिंह -सपा
फूलपुर लोकसभा सीट-नागेंद्र पटेल -सपा
कौशाम्बी लोकसभा सीट -वाचस्पति -सपा
बस्ती लोकसभा सीट -राजकिशोर सिंह -सपा
वाराणसी लोकसभा सीट- इस सीट पर फंसा पेंच
देवरिया लोकसभा सीट-बालेश्वर यादव- सपा
गोरखपुर सदर लोकसभा सीट-प्रवीण निषाद -सपा
कुशीनगर लोकसभा सीट-राधेश्याम सिंह -सपा
क्या कामयाब होगा बसपा और सपा का ये गठबंन्धन ? क्या up से खुलेगा माया अखिलेष का दिल्ली का रास्ता ? हमें कमेंट करकर जरूर बताइये


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